New Kalam 2026 | Agar Pyare Aaqa ﷺ Ki Rehmat Na hoti | Qari Irfan Khan Qasmi |

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हज़रत रिब'ई बिन आमिर (रज़ि.) की रुस्तम से ईमान अफ़रोज़ गुफ़्तगू 🔸

हज़रत रिब'ई बिन आमिर (रज़ि.) की रुस्तम से ईमान अफ़रोज़ गुफ़्तगू 🔸

हज़रत खालिद बिन वलीद (रज़ि.) की इमारत व सरकर्दगी में एक लश्कर ईरानियों से मुक़ाबले के लिए गया, ईरानी लश्कर का सिपहसालार मशहूर ज़माना पहलवान और बहादुर ''रुस्तम'' था। हज़रत खालिद बिन वलीद (रज़ि.) ने रुस्तम की दरख्वास्त पर हज़रत रिब'ई बिन आमिर (रज़ि.) को उससे बातचीत के लिए भेजा। ईरानियों ने रुस्तम का दरबार खूब सजा रखा था, रेशम और हरीर के गद्दे, बेहतरीन क़ालीन, सोने और चाँदी की अशिया और दीगर अस्बाबे-ज़ीनत से आरास्ता-पैरास्ता कर दिया था। हज़रत रिब'ई बिन आमिर (रज़ि.) घोड़े पर सवार, हथियारों से लैस, फटे-पुराने कपड़ों में मलबूस, इस शान के साथ रुस्तम के दरबार में पहुँचे कि नंगी तलवार आपके हाथ में थी। दरबार में रुस्तम का फर्श बिछा हुआ था, आप घोड़े को उसी पर चलाते हुए अंदर जाने लगे। रुस्तम पहलवान के आदमियों ने उनको रोका और उनसे कहा कि कम से कम तलवार तो ज़ेरे-नियाम कर लें। हज़रत रिब'ई बिन आमिर (रज़ि.) ने फ़रमाया कि मैं तुम्हारी दावत पर आया हूँ, मेरी मर्ज़ी और ख़्वाहिश से नहीं, अगर तुम इस तरह आने न दोगे; तो मैं लौट जाऊँगा। जब रुस्तम ने यह देखा तो अपने लोगों से कहा कि उनको इसी हालत में आने दो। चुनाँचे आप इसी शान के साथ रुस्तम के पास पहुँचे और फर्श जगह-जगह से तलवार की नोक की ज़द में आकर फट गया था। रुस्तम ने पूछा कि आप लोग क्या चाहते हैं? हज़रत रिब'ई बिन आमिर (रज़ि.) ने ऐसा जवाब दिया, जो हमेशा के लिए लाजवाब रहेगा। आपने कहा: ''अल्लाहु इब्तअसना लिनुख्रिजा मन शा-अ मिन इबादतिल-इबाद इला इबादतिल्लाह, व मिन ज़ीक़िद-दुन्या इला सअतिहा, व मिन जौरिल-अद्यानि इला अद्लिल-इस्लाम।'' (अल्लाह ने हमें इसलिए मबऊस किया है कि हम अल्लाह के बंदों में से अल्लाह जिनको चाहे; उनको बंदों की ग़ुलामी से निकालकर अल्लाह की बंदगी की तरफ़ लाएँ और दुनिया की तंगियों से निकालकर इसकी वुसअतों में ले जाएँ और दुनिया के मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब के ज़ुल्म व जौर से इस्लाम के अद्ल व इंसाफ़ की तरफ़ लाएँ।) (तारीख़ अत-तबरी: 2/401, अल-बिदाया वन-निहाया: 8/39) इस वाक़िए से इस्लामी मुआशरे के अफ़राद की मज़ाहिरे-कायनात से, दुनिया की दिलफरेबियों से और माद्दी ताक़तों से बे-रग़बती व बे-खौफ़ी का अज़ीमुश्शान मुज़ाहरा हो रहा है, यही चीज़ इस्लामी मुआशरे को कुफ्र व शिर्क से निकालती और शैतानी व ताग़ूती क़ुव्वतों के मुक़ाबले में रूहानी व ईमानी ताक़त बख़्शती है। _____📝📝📝_____मन्क़ूल। इंतेखाब इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप।

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